Earthquake in Delhi: दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किये गये हैं। इसका केंद्र अफगानिस्तान में 220 किलोमीटर नीचे था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.2 मापी गयी है। वहीं भूकंप के झटके महसूस होने पर लोगों में हड़कंप मच गया। लोग घरों से बाहर भागने लगे। वहीं अभी तक इसमें किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। यह भूकंप गुरुवार दोपहर 2:50 बजे महसूस किया गया था।
ऐसे आता है भूकंप
धरती की सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। साथ ही छोटे-छोटे कई अन्य प्लेट भी हैं। जब भी ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती और अलग होती हैं तो इनके बीच हलचल उत्पन्न होती है और उस हिस्से की धरती हिल जाती है। धरती का यह हिलना ही साधारण भाषा में भूकंप कहलाता है। भू मतलब जमीन या धरती और कंप मतलब कंपन अर्थात भूकंप। ज्यादातर भूकंप प्लेट के टकराने से आते हैं। इस दौरान बड़े पैमाने पर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जिसका कई बार असर कई दिनों तक रहता है। और उस क्षेत्र में रुक-रुककर धरती में कंपन होते रहता है, जिसे आफ्टरशॉक कहा जाता है।
भारत में भूकंप का कारण
भारत में मूलरूप से इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराने से भूकंप आता है। हिमालय का क्षेत्र भूकंप के लिए बहुत ही संवेदनशील है, जहां ये दोनों प्लेटें मिलती हैं। साथ ही भारत के नजदीक वर्मा प्लेट भी है। ये भी भारत में भूकंप का कारण बनता है। वहीं विश्व में सबसे अधिक भूकंप प्रशांत महासागर पेटी में आते हैं। जब भूंकप समुद्र या सागर में आता है, तो उसे सुनामी कहा जाता है, जो एक जापानी नाम है। 2004 में जापान में बड़ी सुनामी आयी थी, जिससे जापान बुरी तरह प्रभावित हुआ था और इससे उबरने में काफी समय लगा था।
ऐसे भूकंप को मापा जाता है
जिस जगह से भूकंप शुरू होता है, उसे भूकंप का केंद्र कहा जता है। केंद्र के नजदीक वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके (तीव्रता) तेज महसूस किये जाते हैं। जैसे-जैसे दूरियां बढ़ती जाती हैं, वैसे-वैसे तीव्रता भी कम होती जाती है और एक सीमा के दायरे में समाप्त हो जाती है। इस तीव्रता को रिक्टर स्केल पर सीस्मोग्राफ में दर्शाया जाता है, अर्थात भूकंप की तीव्रता को सीस्मोग्राफ में रिक्टर स्केल में मापा जाता है। इस स्केल में 1 से लेकर 9 तक अंक होते हैं। 1 से 5 तीव्रता वाले भूकंप सामान्य होते हैं। 5 से 7 तीव्रता थोड़ा नुकसानदायक, और 7 से अधिक तीव्रता वाले खतरनाक होते हैं। इसमें भारी क्षति होती है।
भूकंप के लिए भारत के संवेदनशील राज्य
संवेदनशीलता के अनुसार भूकंप प्रभावित क्षेत्रों को पांच जोनों में बांटा गया है। हालांकि वैज्ञानिकों ने पहले जोन को अब हटा दिया है। ऐसा माना गया है कि इस जोन में न के बराबर भूकंप आता है और यहां इसका कोई असर भी नहीं है। अब दो, तीन चार और पांच कुल चार जोनों में भूकंप प्रभावित क्षेत्रों को बांटा गया है। दो जोन वाले क्षेत्र सामान्य होते हैं, जबकि पांचवें जोन में आने वाले क्षेत्र भूकंप के लिए संवेदनशील होते हैं। ज्यादातर विनाशकारी भूकंप इन्हीं क्षेत्रों में आते हैं। भारत में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाण, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पूर्वोत्तर के राज्य एवं गुजरात पांचवे जोन में आते हैं।